ओनके ओबव्वा: मूसल से किले की रक्षा करने वाली वीरांगना

चित्रदुर्ग किले की कहानियों में सबसे प्रिय कहानी ओनके ओबव्वा की है। मदकरी नायक के शासनकाल में हैदर अली की सेना ने किले को घेर लिया था। पहरेदार कहळे मुद्द हनुम की पत्नी ओबव्वा ने चट्टानों की एक संकरी दरार से शत्रु सैनिकों को घुसते देखा और धान कूटने वाले ओनके (मूसल) से एक-एक कर उनका सामना किया।
आज वह दरार ओनके ओबव्वा की खिड़की के नाम से प्रसिद्ध है।
